इस्लाम ही देता है पुरूष को एकपत्नी का आदेश
एक सवाल इण्टरनेट पर बहुत दिनों से घूम रहा है :- //इसलाम मे १ आदमी बहुत औरते रख सकता है, पर १ औरत बहुत आदमी क्यों नहीं...?? क्यों भाई धर्मं को तो ये सिखाना चाहिए कि एक ही औरत रखो, उस से प्रेम करो, परायी नारी पर नजर मत डालो। खैर ये तो हिन्दू धर्मं सिखाता है।...// मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि अपने धर्म के बारे मे मेरे हिन्दू भाई इतने अज्ञानी कैसे हो सकते हैं कि वो ये कहें कि हिन्दू धर्म एक पत्नी रखने की बात सिखाता है ?? .... मेरे भोले भाईयों, आपको पता होना चाहिए कि हिंदू धर्म कहीं भी एक पत्नी की वकालत नहीं करता ... , आज यदि हिंदू एक पत्नी कानून से चलते हैं, तो इस कानून का पूरा का पूरा श्रेय, हमारे देश के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जी को जाता है, जिन्होंने देश की हिन्दू विधि मे हिन्दुओं को केवल एक पत्नी रखने का कानून बनाया, इससे पहले हिंदू पुरूषों के लिए पत्नियो की कोई निर्धारित संख्या नहीं थी और वे असीमित संख्या मे स्त्रियों से विवाह कर सकते थे .... और अधिकांश ऐसा होता था कि एक बार विवाह कर के पुरुष कभी अपनी उस पत्नी की ओर दोबारा पलटकर नहीं आता था, क्योंकि वो अपनी नई नई...