क्या नबी (सल्ल०) ने स्त्रियों में अपशगुन होने की बात फ़रमाई ?

एक आपत्ति ये है कि सही बुखारी, किताब 62 यानी निकाह की किताब मे मुस्लिमों को निकाह के विषय मे सलाह देते हुए नम्बर 30,31 और 32 पर एक हदीस है कि नबी स. फरमाते है कि " अपशगुन व दुर्भाग्य स्त्री , घर या घोड़े मे हो सकता है .." तो प्रश्न ये है कि यदि इस्लाम स्त्रियों और पुरूषों की समानता का दावा करता है तो फिर उपरोक्त हदीस मे नबी स. ने घर, घोड़े और स्त्री को अपशगुन का कारण क्यों कहा ?? जैसा कि मैं बार बार कहता आ रहा हूँ कि मुस्लिमों के लिए सबसे बड़ा धार्मिक दिशा निर्देश है पवित्र कुरान, जिसके विपरीत जाने वाली हर शिक्षा त्याग दी जाती है चाहे वो किसी भी हदीस मे क्यों न हो ... तो अल्लाह के अतिरिक्त किसी और चीज को अपना भला होने का कारण समझना या अपने दुर्भाग्य का किसी व्यक्ति को कारण समझना पवित्र कुरान की इस शिक्षा का विरोध करना है कि किसी व्यक्ति के सौभाग्य या दुर्भाग्य पर केवल अल्लाह का प्रभुत्व है ( सूरह अनआम की आयत 17) ... और किसी व्यक्ति के दुर्भाग्य का कारण उस व्यक्ति के अपने ही कर्म होते हैं (सूरह निसा की आयत 79) दूसरी बात ये कि किसी हदीस पर, विशेषकर संक्षेप मे बयान की गई हदीस पर विश्वास बनाने से पहले उस विषय की कई हदीसों का अध्ययन किया जाना आवश्यक होता है, ताकि हदीस का विस्तार और उसकी सही शिक्षा पता चल सके ... लिहाजा इस हदीस से सम्बन्धित अन्य हदीस का अध्ययन करने पर जो पता चलता है , उनमे से एक तथ्य तो ये है कि इस्लाम मे अपशगुन जैसे अंधविश्वास की यानी किसी चीज या व्यक्ति के कारण जीवन मे दुर्भाग्य आने के आधारहीन विश्वास की कड़ी भर्त्सना अनेक हदीसों मे ही की गई है ... और इसको शिर्क (ईश्वरीय सत्ता मे अन्य की भागीदारी) समान महापाप बताया गया है । नबी स. ने स्पष्ट शब्दों मे कई स्थानों पर फरमाया है, कि अपशगुन जैसी कोई चीज नहीं होती, अपशगुन पर विश्वास रखना शिर्क है [देखें हदीस अहमद (4194), अबू दाऊद (3910), तिरमिज़ी (1614) और इब्ने माजाह (3538) मे ] दूसरा तथ्य इस संक्षेप हदीस का विस्तार पढ़ने पर पता चलता है । देखिए :- मुस्नद अहमद बिन हम्बल मे संख्या 6/246 पर हदीस है कि "अबू हसन ने बताया कि दो आदमी, मां आएशा रज़ि. के पास गए और पूछा कि अबू हुरैरह रज़ि. रिवायत करते हैं कि अपशगुन व दुर्भाग्य स्त्री, घर या घोड़े मे हो सकता है ... इस पर मां आएशा ने जवाब दिया कि उस रब की कसम जिसने नबी स. पर कुरान नाज़िल किया, अल्लाह के रसूल स. ने ये कभी नहीं कहा, बल्कि आप स. ने ये कहा था कि अज्ञानी लोगों ने इस किस्म का अंधविश्वास पाल रखा था." इस हदीस को अल-हाकिम ने सहीह कहा है ( 2/479 ) अन्य विद्वानों ने भी इस हदीस को सही घोषित किया है . अल-तयलिसी की मुस्नद मे 1/215 पर हदीस है कि "मुहम्मद बिन राशिद रिवायत करते हैं कि मां आएशा रज़ि. से पूछा गया कि अबू हुरैरह रज़ि रिवायत करते हैं कि अपशगुन व दुर्भाग्य स्त्री, घर या घोड़े मे हो सकता है ... इस पर मां आएशा ने जवाब दिया कि अबू हुरैरह रज़ि. इस हदीस को ठीक प्रकार याद नहीं कर पाए क्योंकि जब वो घर मे दाखिल हुए, उस वक्त नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ये फरमा रहे थे कि “उन यहूदियों पर अल्लाह की लानत हो जो ये कहते हैं कि अपशगुन व दुर्भाग्य स्त्री, घर या घोड़े मे हो सकता है ...,” मां आएशा बताती हैं कि अबू हुरैरह बाद मे आने के कारण हदीस का सिर्फ आखिरी भाग सुन सके.... इस हदीस को भी सही हदीस और कुरान की शिक्षा के अनुकूल होने के कारण विद्वानों ने प्रमाणिक माना है ...!! तो ये रही उस हदीस को लेकर पैदा की गई गलतफहमी का समाधान .... कि किसी स्त्री को अपशगुनी और मनहूस मानना एक ऐसा विश्वास है जिस विश्वास को रखने वाले पर नबी स. ने लानत भेजी है । वास्तव मे शगुन अपशगुन मे अंधविश्वास के कारण ही हमारे देश मे अनेकों स्त्रियों और बच्चियों की जीना मुहाल कर दिया गया ये कह कह कर कि फलानी पैदा होते ही अपनी मां या बाप को खा गई, या शादी होते ही पति को खा गई ..... अल्लाह का शुक्र है कि इस्लाम मे ऐसी कोई दुष्ट अमानवीय रीति नहीं है ... बल्कि इस्लाम मे तो स्पष्ट तौर पर किसी परिवार मे होने वाला स्त्री का बेटी के रूप मे जन्म परिवार के लिए अल्लाह की रहमत यानि ईश्वर द्वारा दिया गया सुख शांति का आशीर्वाद बताया है । यदि कोई कहे कि इस्लाम मे बेटी को तो रहमत बताया गया है पर पत्नी को अपशगुनी बताया गया है तो ये भी एक झूठ होगा क्योंकि प्यारे नबी स. हमे ये भी स्पष्ट तौर पर बता चुके हैं कि अल्लाह उस व्यक्ति की पत्नी को उस व्यक्ति के लिए शुभ बनाता है, जो व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ न्याय करता है, नबी स. ने फरमाया कि “जो व्यक्ति अपनी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए ( अपनी यौन शुचिता को बनाए रखने के लिए ) विवाह करता है, और अपनी पत्नी के साथ दयालुता और भलाई का व्यवहार करता है तो अल्लाह आशीर्वाद देकर उस वधू को वर के लिए शुभकारी बना देता है, और उस वर को वधू के लिए शुभकारी बना देता है ॥”

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