हलाला की वास्तविकता क्या है ?
फिल्म मीडिया मे तलाक और हलाला की रस्म की तस्वीर देखिए ज़रा
"मर्द ने अपनी मर्दानगी के नशे मे चूर होकर बेचारी औरत को तलाक के तीन पत्थर मार दिए, और ज़िन्दगी भर के लिए बांधा गया शादी का बंधन एक झटके मे टूट गया .... रोती कलपती मजबूर औरत माएके आ बैठी, और अपने नसीब पर रो रो कर आंखे सुजाती रही .... फिर एक दिन उसके शौहर को अपनी बीवी पर प्यार आया, और शौहर अपनी मिल्कियत यानी अपनी बीवी के जिस्म को अपने से पहले किसी गैर मर्द को सौंपने पर 'मजबूर' हो गया ताकि वो दूसरा आदमी उसकी तलाकशुदा से शादी कर के उसके साथ रात गुजारे और फिर उसे तलाक दे दे ताकि हलाला की रस्म पूरी हो सके ॥"
हमारे देश मे सिनेमा और टीवी के जरिए मुस्लिमों मे तलाक के विधान का बहुत ही गलत रूप, और हलाला की रीति का बेहद अश्लील रूप से वर्णन किया गया है, इन विधानो को स्त्री पर अत्याचार दिखाया गया है,
वास्तविकता ये है कि हलाला का क़ानून तलाक़ देने से मर्दों को रोकने के लिए बनाया गया है, हलाला का क़ानून पुरुषों के लिए एक चेतावनी है कि अगर उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया तो दोबारा उनकी आपस में शादी असम्भव हो जाएगी ... इसलिए वो बिना किसी ठोस वजह अपनी पत्नी को तलाक़ देने की बात भी अपने दिमाग में न लाएं...
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अव्वल तो एक बैठक मे तलाक को इस्लाम मे पाप माना गया है.. बल्कि कुरान 2:228-229 मे अल्लाह के आदेशानुसार तलाक तीन महीने की अवधि मे किसी भी पल लौटा लेने की पूरी सम्भावना के बावजूद पति पत्नी मे मेल न होने के बाद ही पूर्ण हो सकेगा , इतनी अवधि मे पति द्वारा तलाक के फैसले को प्रभावित करने का अवसर पत्नी के भी पास रहेगा, यानी तलाक एकतरफा और अन्यायपूर्ण न रहेगा ।
इसके बाद भी यदि पूर्ण (तीन बार) तलाक़ दे दिया गया, तो फिर पति पत्नी एकदूसरे के लिए हराम हो जाएंगे और दोबारा उनके विवाह के संयोग को दुर्लभतम बना दिया गया है..!!!
...ये विधान इसलिए ताकि पति पत्नी खूब ध्यान रखें कि अगर सचमुच उन दोनों का साथ जीवन बिताना मुश्किल हो तभी तलाक का फैसला लिया जाए ... वरना तीन महीनों मे पति पत्नी आपस मे बैठकर खूब राय मशविरा कर लें , बहुत मुमकिन है कि विवाह टूटने की नौबत न आए
हलाला के बारे मे ये समझ लिया गया है कि खास हलाला को पूरा करने के मकसद के लिए एक तलाकशुदा औरत की शादी किसी ऐसे आदमी से करवाई जा सकती है जो उससे हमबिस्तरी कर के उसे तलाक देने को राज़ी हो.... जबकि ये तो खुली हरामकारी होगी कि हलाला की आड़ लेकर अनजान मर्द औरत एक रात के शौहर बीवी बनें ....
ऐसी शादी जिसमे किसी औरत के साथ निकाह होने से पहले ही उस औरत को तलाक देने की बात तय कर दी जाए यानी कॉन्ट्रैक्ट पर शादी [ MUTA MARRIAGE ] की जाए ऐसी शादी इस्लाम मे हराम है, ऐसी शादी के हराम होने का बयान और ऐलान बहुत सी अहादीस मे है, जैसे .... सही बुखारी Vol.5/59/527, सही मुस्लिम 8/3259, सही मुस्लिम 8/3260, सही मुस्लिम 8/3262, सही मुस्लिम 8/3263, सही मुस्लिम 8/3264, सही मुस्लिम 8/3265 और अनेक अहादीस .
और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज के हराम होने की वजह पवित्र कुरान की आयत 4:24 मे अल्लाह का ये हुक्म है कि ''शादी (मर्द और औरत, दोनों की पाक दामनी यानी यौन शुचिता) पाक दामनी की हिफाज़त करने के लिए करो, न कि नाजायज ढंग से जिस्मानी ताल्लुकात बनाने के लिए ''
हलाला के लिए प्लानिंग कर के किसी औरत से शादी करने वाला व्यक्ति भी न उस औरत के सतीत्व की सुरक्षा करेगा न अपनी, बल्कि उसके दिल मे तो उस औरत के साथ रात गुज़ार कर उससे अलग हो जाने का खयाल ही होगा......
हलाला का अस्ल ये है, कि हलाला को प्लान बिल्कुल नहीं किया जा सकता, बल्कि जब एक बार मर्द अपनी बीवी को पूरी तरह तलाक दे चुका , तो फिर दोबारा से उसी औरत से शादी करना उस आदमी के इख्तियार मे नही रह जाता, वो किसी भी मर्द को इस बात के लिए हायर नहीं कर सकता कि वो उसकी तलाकशुदा से शादी कर के उसे तलाक दे दे, क्योंकि ये हराम है, .
बल्कि अब उसी औरत से दोबारा उसकी शादी बस एक अपवाद की स्थिति में हो सकती है कि उसकी तलाकशुदा बीवी अपना नया घर बसाने के लिए ( हलाला के लिए नहीं ) नई शादी करे , और फिर कभी उसके दूसरे शौहर से भी खुद ही अलगाव हो जाए, या उसके नए शौहर का इंतकाल हो जाए, तब उस हाल में पहला शौहर उसको वापस निकाह का पैग़ाम भेज सकता है, इस खुद ब खुद पैदा हुई सिचुएशन के अलावा कोई सूरत नही है कि तीन तलाक़ों के बाद, उन्ही औरत मर्द की वापस शादी हो सके ....॥
यानी, आप समझ सकते हैं कि अल्लाह के बताए क़ानून के मुताबिक़ हलाला एक लगभग नामुमकिन सिचुएशन है ... इसलिए किसी भी मुस्लिम को ये ख़ास ख्याल रखना ज़रूरी है कि वो तलाक जैसी संगीन बात का फैसला खूब सोच विचार कर ले, तलाक को कभी एक खेल की तरह न खेले, और अगर खूब सोचविचार कर तलाक़ दे चुका, तो फिर उसी बीवी से वापस निकाह का ख्वाब न देखे !!
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